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My Travels and experiences...
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दूसरे दिन हम लौसान्न घूमने गए। लौसान्न लेक जिनेवा के किनारे बसा है, जो देश के सबसे सुंदर जगहों में गिनी जाती है. असल में हम शहर नही घूमना चाहते थे, इस झील के किनारे के इलाके घूमना चाहते थे। तो हम लौसान्न तो पहुचे पर वहां से हम तुंरत Montreux जाने वाली ट्रेन पकड़े। यह एक लोकल ट्रेन है जो लेक जिनेवा के किनारे-किनारे चलती है। बहुत सुंदर रास्ता है यह। एक तरफ़ सुंदर पहाड़ जिनपर अंगूर की खेती होती है, और दूसरी तरफ़ बहुत सुंदर सी झील।
हम लोग रास्ते में जो स्टेशन सुंदर लगता था, उसपे उतर जाते थे। पहले हम एक बहुत छोटे स्टेशन संत सोफोरिन पे उतर गए। स्टेशन से निकल कर गाँव में गए। बगल में एक छोटा सा रास्ता था जो झील के किनारे जाता था। पत्थर का प्लेटफोर्म बना था। थोडी हवा चल रही थी तो झील की लहरें आकर टकराती थी। मैं पहले ही बता दूँ कि फोटो में जितना सुंदर लगता है, उससे कहीं ज़्यादा सुंदर जगह है।
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रिग्गेनबेर्ग में बस से उतरे तो सड़क के एक तरफ़ पहाडियां और दूसरी तरफ़ झील थी। बीच की जगह में प्यारा सा गाँव। हम लोग तो बस नज़ारे देखते रह जा रहे थे। मैंने इन्टरनेट से इस इलाके का नक्शा प्रिंट कर लिया था तो रास्ता पता था। नीचे झील की तरफ़ जाते हुए रास्ते पेहम बढ़ गए। रास्ते में एक चर्च था प्यारा सा। उसके आगे नीचे जाने पे झील से लगा हुआ हमारा होटल सीबेर्ग।
हम लोग फ्रेश होकर तुंरत आगे घूमने चल दिए। अभी हम जितना उतरे थे फ़िर अब उतना ही चढ़ना पड़ रहा था। बस स्टाप पहुचे तो बस निकल चुकी थी। तो हम स्टेशन की ओर गए। यहाँ पे आने जाने की कोई दिक्कत नही होती। हर गाँव कसबे तक ट्रेन जाती है। स्टेशन पहुचे तो वहां हम अकेले थे। एक दम साफ़ सुथरा. टीटी तक नही था। सिर्फ़ स्विस रेलवे की ट्रेडमार्क घड़ी की आवाज़ आ रही थी. एक बार को लगा की यह स्टेशन बंद है, कोई ट्रेन नही आती। पार तभी एक जगमगाती लोकल ट्रेन आ पहुची।
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मैं स्विट्जरलैंड बहुत दिनों से जाना चाहता था पर आज तक चांस नही मिला था। इस बार मुझे मौका मिला तो मैंने तय कर लिया की ज़रूर जाऊंगा। सब कुछ प्लान किया, बुक किया, और रचना को भी बुला लिया इंडिया से। सब कुछ इन्टरनेट से पढ़ पढ़ के पता किया और प्लान किया। मुझे ज़्यादा टाइम नही मिलता, क्योंकि मुझे ऑफिस का काम भी देखना था। एक दिन की छुट्टी लिया तो वीकेंड के साथ मिला कर ३ दिन मिले। इतना काफ़ी नही था, पर जो टाइम मिल रहा था उसको बहुत अच्छे से घूमने का सोचा।
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I wanted to write about my trip to Switzerland, but before that, I want to first write few tips based on my experience. This will be helpful for others planning to visit. This is based on my experience and taste. It may need to be customised for your travel. I am not going to tell what all to see in detail because that information is available in the Swiss Tourism website (http://www.myswitzerland.com).
DURATION
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India is a great place to visit and everyone is invited and welcome. Some people say that visiting India is not good and filled with trouble and is unsafe. But that is far from truth. India is not difficult, it is just different. So, I compiled a list of ideas, suggestions and tips for people travelling from European nations like Germany, France, Switzerland, Finland, Sweden etc. to India, for vacation or for work. This is fairly general information and should apply to people of other nations too. I have visited these countries so I know what all cultural differences are there to overcome.
TRAVEL PLANNING
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I love this car.
and I love apricots.
I love this beautiful row of houses.
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इस वीकेंड कहीं बहार जाने का प्रोग्राम नही बनाये। सोचे की अपने शहर को तो अच्छे से देख लें। पिछली बार जब मैं घूमा था तो मेरे पास Nuremberg Pass था। यह १९ € का होता है और इससे सारे म्यूज़ियम देख सकते हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे सिटी पास यूरोप के हर शहर में होते हैं, और अच्छी डील होती है. अब दो दिन तो सारे म्यूज़ियम देखने के लिए कम ही थे। तो मैंने सिर्फ़ बड़े म्यूज़ियम देखे। कई छोटे म्यूज़ियम रह गए थे और शहर तो मैंने लगभग देखा ही नही था! इसलिए इस वीकेंड कहीं बहार नही गया।
यूरोप के बड़े शहरों में कोई एक बस या ट्राम होती है जो शहर के सब टूरिस्ट स्पॉट पे जाती है। यह ख़ास टूरिस्ट के लिए ही प्लान की जाती है। नुरेम्बर्ग में बस रूट ३६ टूरिस्ट लाइन है। (हेलसिंकी, फिनलैंड में ट्राम नम्बर ७A थी ) तो मैं होटल से प्लार्रेर गया जहाँ से यह शुरू होती है और झट से इस बस में बैठ गया।
यह बस पहले मुझे मेन मार्केट ले गई। यह एक लोकल मार्केट है. यहाँ पे किसान अपने खेत पे उगाये हुए फल, फूल और सब्जियां बेचते हैं। फल बिल्कुल ताजे दिख रहे थे। अच्छे तरह से सजे हुए फल-सब्जियां और फूलों की वजह से रंग बिरंगा नज़ारा बहुत अच्छा लग रहा था। छूते फूल लोग अपने घर की खिड़कियों पे लगते हैं। गार्डन के लिए थोड़े बड़े फूल और छोटे पौधे ( जैसे हरी मिर्च और पुदीना) भी मिल रहे थे। अप्रिकोट थो खाते ही हैं, सुखा हुआ मेवे की तरह इस्तेमाल होता है। मैंने थोड़ा थोड़ा दोनों लिया।
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| From Nuremberg City |
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| From Nuremberg City |
बस इसके बाद नुरेम्बर्ग किले से होते हुए Wöhrder Wiese पंहुचा जो नुरेम्बर्ग के बीच में बड़ा सा पार्क। ऐसी जगह हर शहर में होनी चाहिए। न्यू यार्क के सेंट्रल पार्क को तो सब जानते हैं। मुंबई के जॉगर्स पार्क का अच्छा रूप. यहाँ पे एक तालाब था, झरने लगे थे, jogging के लिए जगह थी, बच्चों के लिए झूले लगे थे और ऐसे ही बहुत कुछ। मैंने यहाँ पे १-२ किलोमीटर टहला और बच्चों को खेलते हुए देखने के मज़े लिए। फ़िर उसी बस से आगे बढ़ गया. रास्ते में कई जगहें अच्छी लग रही थी पर रुका नही.
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| From Nuremberg City |
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| From Nuremberg City |
इसके बाद बस के आखिरी स्टाप पे पहुँचा जो की documentations center है। किसी ज़माने में यहाँ पे नाज़ी पार्टी (national socialist party) की रैली करायी जाती थी। यह ११ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बना है और सबसे बड़ा मंच रोम के कोल्लोसेयम की तरह दीखता था. बहुत भव्य ईमारत थी, जैसे रोम का कोल्लोसेयम। यहाँ घूम के मैन होटल वापस आ गया।
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| From Nuremberg City |
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| From Nuremberg City |
सन्डे को मैं फुरत गया जो नुरेम्बर्ग के पास छोटा सा शहर है। कोई ख़ास जगह नही देखनी थी, बस ऐसे ही तेहेलने. कई लोग यहाँ साइकिल चला पे घूमे रहे थे. बहुत शांत सी जगह थी.
| From Nuremberg Suburbs |
| From Nuremberg Suburbs |
शायद आप जानते नही होंगे, Faber Castell (http://www.faber-castell.in) नुरेम्बर्ग की कंपनी है। फाबर कास्टल पेंसिल और क्रेयोन बनने की यह बहुत पुराणी (1761) कंपनी है. इनका अपना एक महल है (http://www.faber-castell.de/13511/The-Company/The-Faber-Castell-Castle/index_ebene3.aspx ) . आज बंद था तो अन्दर नही जा पाया . वैसे बहार से देखने में लगता था की जैसे कहानी में से निकल के आया है.
| From Nuremberg Suburbs |
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Prateek
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12:03 am
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